आंध्रप्रदेश के विजयनगरम जिले में रविवार की शाम दो ट्रेनें टकरा गईं। हादसे में 9 यात्रियों की मौत हो गई जबकि 40 यात्री घायल हैं। यह हादसा विजयनगरम जिले में अलमांडा-कंकटपल्ली के बीच हुआ।
रेलवे के मुताबिक, 08532 विशाखापट्टनम – पलासा पैसेंजर ट्रेन को 08504 विशाखापट्टनम-रायगड़ा पैसेंजर ट्रेन ने पीछे से टक्कर मार दी। वाल्टेयर डिवीजन रेलवे मैनेजर सौरभ प्रसाद ने बताया, टक्कर में पांच डिब्बे पटरी से उतर गए । इनमें से तीन कोच आगे की ट्रेन के थे और दो डिब्बे पीछे की ट्रेन के थे।
ईस्ट कोस्ट रेलवे के CPRO विश्वजीत साहू ने बताया, यह हादसा मानवीय भूल के चलते हुआ। पीछे से आ रही विशाखापत्तनम-रायगड़ा पैसेंजर ट्रेन ने सिग्नल को ओवरशूट किया, जिससे टक्कर हो गई।
राहत और सहायता कार्य जारी
वाल्टेयर मंडल रेल प्रबंधक (DRM) ने बताया कि बचाव अभियान जारी है, सहायता और एम्बुलेंस के लिए स्थानीय प्रशासन और NDRF को सूचित किया गया है। दुर्घटना राहत ट्रेनें घटनास्थल पर पहुंच गई हैं। वहीं, मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि CM वाईएस जगनमोहन रेड्डी ने राहत कार्य के लिए सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने को कहा है। मौके पर एम्बुलेंस और अन्य जरूरी सामान पहुंचा दिया गया।
रेलवे ने आपात नंबर जारी किए ईस्ट कोस्ट रेलवे ने आपात नंबर जारी किए हैं। इनमें भुवनेश्वर- 0674-2301625 2301525, 2303069 और वाल्टेयर डिवीजन 0891-2885914 हैं।
अब पढ़िए पिछले 5 महीने में हुए 3 बड़े रेल हादसों के बारे में…..
25 अक्टूबर: आगरा में पातालकोट एक्सप्रेस के 3 जनरल कोच पूरी तरह जल गए। इसमें कुल 13 लोग घायल हुए हैं। आग लगने के बाद कई यात्रियों ने ट्रेन से कूदकर जान बचाई। हादसा रेल मंडल में भांडई रेलवे स्टेशन के पास शाम 3.45 बजे हुआ। उस समय ट्रेन की स्पीड 70 से 80 किमी के बीच थी।
10 अक्टूबर : बिहार में दिल्ली से गुवाहाटी जा रही नॉर्थ-ईस्ट एक्सप्रेस (12506) हादसे का शिकार हो गई। ट्रेन की सभी 21 बोगियां पटरी से उतर गईं, जिनमें एसी-3 टियर की दो बोगियां पलट गईं। इस हादसे में 4 यात्रियों की मौत हुई, जिनमें दो पुरूष, मां और बेटी (8) शामिल हैं।
12 जून: ओडिशा में हुए ट्रेन हादसे में 275 लोगों की जान चली गई थी। जिस रूट पर हादसा हुआ, वहां गाड़ियों के बीच टक्कर रोकने वाला एंटी कोलिजन सिस्टम ‘कवच’ मौजूद नहीं था। मरने वालों के आंकड़ों को हिसाब से देखें तो, ये देश का तीसरा सबसे बड़ा रेल हादसा था।
रेलवे का एक्सीडेंट प्रूफ सुरक्षा कवच: अश्विनी वैष्णव रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मई 2022 में ट्रेन में लगने वाले कवच सिस्टम के बारे में बताया था। उन्होंने कहा था- ‘कवच एक ऑटोमेटिक रेल प्रोटेक्शन की टेक्नोलॉजी है। इसमें ये होता है कि मान लीजिए दो ट्रेन गलती से एक ही ट्रैक पर आ गई तो उसके पास आने से पहले कवच ब्रेक ट्रेन को रोक देगी, जिससे एक्सीडेंट होने से बच जाएगा।’ रेल मंत्री के इस ब्यान के बाद से ट्रेन डिरेल होने के कई मामले सामने आ चुके हैं।
रेल कवच दो ट्रेनों के बीच टक्कर को आखिर रोकता कैसे है?
इस टेक्नोलॉजी में इंजन माइक्रो प्रोसेसर, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम यानी GPS और रेडियो संचार के माध्यम सिग्नल सिस्टम और कंट्रोल टावर से जुड़ा होता है। यह ट्रेन के ऐसे दो इंजनों के बीच टक्कर को रोकता है, जिनमें रेल कवच सिस्टम काम कर रहा हो।
ट्रायल के एक साल बाद भी सिर्फ 65 लोको इंजनों में लगा कवच टेक्नोलॉजी
मई 2022 में अश्विनी वैष्णव ने रेल हादसे रोकने के लिए इंजनों को सुरक्षा कवच पहनाने की घोषणा की थी। एक साल बाद भी 19 रेलवे जोन में से सिर्फ सिकंदराबाद में ही कवच लगाने की प्रक्रिया शुरू हुई है। देश में कुल 13,215 इलेक्ट्रिक इंजन हैं। इनमें सिर्फ 65 लोको इंजनों को ही कवच से लैस किया गया है। 2022-23 वित्तीय वर्ष में भारतीय रेलवे ने देशभर में कम से कम 5000 किलोमीटर रूट पर कवच लगाने का लक्ष्य रखा है।